Wednesday, 20 February 2013

चंद शेर

1.

गुजरे वक़्त में मैंने खुद को कुछ यूँ तलाशा 
जैसे डूब रही हो नैया और छूटती हो आशा ...

2.

मिले तो मुलाकात के कीमत वसूल गए 
खुद हसें और मुझको रुला के चले गए ...

3.

उसने मुझे तन्हा देखा अधूरा समझा 
मिला भी तो कहाँ कभी पूरा समझा ...

4.

तन्हाई की रात थी बहुत देर से गुजरी
ख़ामोशी रौशन थी और साँस थी ठहरी ...

5.

इश्क में रूठना, नाराज़ होना अदाकारी होता है 
जाम अगर न छलके तो कहाँ खुमारी होता है ...

6.

महफ़िल सजी और मेरे इश्क का जनाज़ा निकला 
हाय "धरम "ये कैसा प्यार का खामियाजा निकला

7.


खतरों का सिलसिला उसने जारी रखा 
मुफलिसी में भी इश्क का बीमारी रखा 

8.


अब तो यहाँ हर जगह  इन्शां बिकते हैं 
मगर फिर भी उसने अपना एतवारी रखा 

Tuesday, 12 February 2013

तन्हाई भी न रही


मोमबत्ती की मद्धिम रौशनी थी
सामने आइना था
मैं खुद को तलाश रहा था
तन्हाई मेरे बगल से गुजरी थी
चेहरे पर नकाब लिए
मैंने रोका उसे
बोला तू तो मेरी अपनी है
तू मुझसे दूर क्यूँ है
वो बोली
अब तन्हाई भी तेरी अपनी न रही

Saturday, 2 February 2013

लकीर


मेरा प्यार था दरिया था बह गया
तेरी खींची लकीरें को पार कर गया
वापस आया तुम्हें छू कर आया
कुछ यादें समेट कर साथ लाया

तेरे हुस्न की गर्मी से
तेरे अश्क सूख गए हैं मगर
यकीं है तेरे दिल का रूखापन
जरुर थोड़ा गीला हुआ होगा