Saturday, 21 June 2025

आसमाँ के ऊपर छत देखना

ये ऐसी हक़ीक़त है कि इसको ख़्वाब में भी मत देखना 
कि मन का एक वहम है आसमाँ के ऊपर छत देखना
 
जंग दो दिलों के दरमियान है यह कोई ख़ूनी खेल नहीं 
ऐ! तुर्बतों में दफ़्न एहसासात  तुम अपनी बढ़त देखना
   
परिंदों ने आशियाँ सजाया था  तुमने दरख़्त काट दिया 
ऐ! आदम-ज़ाद तू अब यहॉँ हर मंज़र में ख़ल्वत देखना

दोनों अपने जज़्बात को एक साथ सिलना जूड़ा बनाना   
ये बातें किताबी हैं अपने यार की बाँहों में जन्नत देखना

यह कोई मामूली मरज़ तो नहीं है मक्कारी का नशा है  
बाद फ़रेबी के आईने में अपना क़द्द-ओ-क़ामत देखना 
  
छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते का क़त्ल यह गुमाँ कैसा है
दिल को पसंद नहीं  औरों की शान-ओ-शौकत देखना

कि वक़्त ढल चुका है अब वहाँ से क़याम करो "धरम"
बाद में नफ़ा'-नुक़सान खोजना अपनी तबी'अत देखना