Saturday, 10 January 2026

हालात भी बदलने लगे

जब ईमान बदला तो हालात भी बदलने लगे  
ख़ुद से पूछने वाले सवालात भी बदलने लगे
 
बस एक सवाल था अब्र बराबर क्यूँ न बरसे  
इस पर जुर्म भी किया  बात भी बदलने लगे

फ़िज़ा-ए-उल्फ़त में  तारीक़ी बात घोली गई   
फिर उस बात पर  जज़्बात भी बदलने लगे

कि बात अब हवा पानी रौशनी तक आ गई
बुनियादी सारे  मु'आमलात भी बदलने लगे

पहले तो सर-ए-आम इक़रार-ए-जुर्म कराये
फिर लगाने वाले  दफ़'आत भी बदलने लगे

वहाँ क़िमार-बाज़ की बड़ी लम्बी क़तार थी
बाज़ी आते-आते ता'ज़ीरात भी बदलने लगे

उस शख़्स की "धरम" अब हैसियत देखिए  
उसके इशारे पर दिन-रात भी बदलने लगे