जब ईमान बदला तो हालात भी बदलने लगे
ख़ुद से पूछने वाले सवालात भी बदलने लगे
बस एक सवाल था अब्र बराबर क्यूँ न बरसे
इस पर जुर्म भी किया बात भी बदलने लगे
फ़िज़ा-ए-उल्फ़त में तारीक़ी बात घोली गई
फिर उस बात पर जज़्बात भी बदलने लगे
कि बात अब हवा पानी रौशनी तक आ गई
बुनियादी सारे मु'आमलात भी बदलने लगे
पहले तो सर-ए-आम इक़रार-ए-जुर्म कराये
फिर लगाने वाले दफ़'आत भी बदलने लगे
वहाँ क़िमार-बाज़ की बड़ी लम्बी क़तार थी
बाज़ी आते-आते ता'ज़ीरात भी बदलने लगे
उस शख़्स की "धरम" अब हैसियत देखिए
उसके इशारे पर दिन-रात भी बदलने लगे