सियासत का खेल कितना नंगा था
मुद्दा वज़ीरों का सिर्फ दंगा था
जो बन जाएगी दूसरी सरकार
हर ओर होगी क़त्ल औ' हाहाकार
एक के बाद एक सब लग गए तुष्टिकरण में
मुद्दा भ्रष्टाचार औ' मानवता उड़ गया गगन में
लगे बस ठोकने ताल कि हम ही हैं तुम्हारे रक्षक
बाकि सब तो हैं राक्षस औ' तुम्हारे भक्षक
डराकर मानव को दानव ही तो जीता है
कोई मानव कहाँ किसी का लहू पीता है
खुद देकर ज़ख्म आरोप किसी और सर मढ़ दिए
जो न माने बात तो खुलेआम सीने पर चढ़ गए
डराए धमकाए और क़त्ल भी करवाये
और रखे हैं अरमान कि लोग उन्हें ही अपनाये
लिया धरा पर जन्म तो जीवन पर अधिकार सिद्ध है
एक बार खुद भी तो परखें कि कौन गरुड़ कौन गिद्ध है
मानव से मानव को तोडना एक राक्षशी प्रवृत्ति है
मिलाकर जो चल सके सबको उसी की राष्ट्र में भक्ति है
जय हिन्द जय भारत
मुद्दा वज़ीरों का सिर्फ दंगा था
जो बन जाएगी दूसरी सरकार
हर ओर होगी क़त्ल औ' हाहाकार
एक के बाद एक सब लग गए तुष्टिकरण में
मुद्दा भ्रष्टाचार औ' मानवता उड़ गया गगन में
लगे बस ठोकने ताल कि हम ही हैं तुम्हारे रक्षक
बाकि सब तो हैं राक्षस औ' तुम्हारे भक्षक
डराकर मानव को दानव ही तो जीता है
कोई मानव कहाँ किसी का लहू पीता है
खुद देकर ज़ख्म आरोप किसी और सर मढ़ दिए
जो न माने बात तो खुलेआम सीने पर चढ़ गए
डराए धमकाए और क़त्ल भी करवाये
और रखे हैं अरमान कि लोग उन्हें ही अपनाये
लिया धरा पर जन्म तो जीवन पर अधिकार सिद्ध है
एक बार खुद भी तो परखें कि कौन गरुड़ कौन गिद्ध है
मानव से मानव को तोडना एक राक्षशी प्रवृत्ति है
मिलाकर जो चल सके सबको उसी की राष्ट्र में भक्ति है
जय हिन्द जय भारत
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