दुखता नहीं है दिल किसी राहगर के लिए
आग लग के बुझ चुका है हमसफ़र के लिए
समंदर के मौज़ों पर बहुत अठखेलियां हुई
ज़ीस्त अब ढूंढता है किनारा बसर के लिए
दुनियाँ देख ली ज़माने को समझ भी लिया
कदम खुद-ब-खुद चल पड़ता है घर के लिए
दुनियाँ की रौशनी में अब तो आँख जलता है
जाँ बस रुकी है ज़ीस्त के अंतिम प्रहर के लिए
हर कब्रिस्तान की ज़मीं अब तो छोटी पड़ रही है
"धरम" शहर में खुल चुका है दुकाँ ज़हर के लिए
आग लग के बुझ चुका है हमसफ़र के लिए
समंदर के मौज़ों पर बहुत अठखेलियां हुई
ज़ीस्त अब ढूंढता है किनारा बसर के लिए
दुनियाँ देख ली ज़माने को समझ भी लिया
कदम खुद-ब-खुद चल पड़ता है घर के लिए
दुनियाँ की रौशनी में अब तो आँख जलता है
जाँ बस रुकी है ज़ीस्त के अंतिम प्रहर के लिए
हर कब्रिस्तान की ज़मीं अब तो छोटी पड़ रही है
"धरम" शहर में खुल चुका है दुकाँ ज़हर के लिए
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