जब कभी कल और आज में एक उम्र का फ़ासला होता है
तब हर वक़्त तन्हाई में भी एक एहसास-ए-क़ाफ़िला होता है
जब चमन से ज़ख्म निकलता है तो रुह काला पड़ जाता है
"औ" आँखों में बाद एक ज़लज़ले के दूसरा ज़लज़ला होता है
तीरगी के फ़िज़ा में उम्मीद-ए-रौशनी यूँ ही नहीं मिलती
चिराग़-ए-दिल जलाए रखने का एक अलग हौसला होता है
हर ज़िस्म यूँ ही ग़म को अपने अंदर पनाह नहीं दे सकता
ग़म को सुकूँ से सुलाने का एक अलग ही मरहला होता है
एक ही ज़िस्म में दिल-औ-दिमाग दोनों को बखूबी संभालना
ज़िस्म में दिल या दिमाग किसी एक का अलग घोंसला होता है
जब भी दरम्यां दो दिलों के "धरम" कोई भी मसअला होता है
चारों आँखें बंद होती हैं तब कहीँ जाकर सही फ़ैसला होता है
तब हर वक़्त तन्हाई में भी एक एहसास-ए-क़ाफ़िला होता है
जब चमन से ज़ख्म निकलता है तो रुह काला पड़ जाता है
"औ" आँखों में बाद एक ज़लज़ले के दूसरा ज़लज़ला होता है
तीरगी के फ़िज़ा में उम्मीद-ए-रौशनी यूँ ही नहीं मिलती
चिराग़-ए-दिल जलाए रखने का एक अलग हौसला होता है
हर ज़िस्म यूँ ही ग़म को अपने अंदर पनाह नहीं दे सकता
ग़म को सुकूँ से सुलाने का एक अलग ही मरहला होता है
एक ही ज़िस्म में दिल-औ-दिमाग दोनों को बखूबी संभालना
ज़िस्म में दिल या दिमाग किसी एक का अलग घोंसला होता है
जब भी दरम्यां दो दिलों के "धरम" कोई भी मसअला होता है
चारों आँखें बंद होती हैं तब कहीँ जाकर सही फ़ैसला होता है
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