कि जहाँ से जैसा भी मुझे ख़्याल आया मैंने सब कुछ बयाँ कर दिया
दिल के एक हिस्से में आग लगाई औ" दूसरे हिस्से को धुआँ कर दिया
ज़िंदगी के हरेक कदम के लिए कई टुकड़ों में अपनी ज़मीं तलाशी
औ" बाद उसके तलाशे ज़मीं के सारे टुकड़ों को आसमाँ कर दिया
वो सबसे पुरानी किताब निकाली जिसमें कभी एक ग़म महफूज़ था
मैंने फिर से पढ़ा औ" एक-एक हर्फ़ को ग़मों का आशियाँ कर दिया
वो एक आवाज़ उठी थी तो तख़्त हरेक सियासत का हिल उठा था
हुक़ूमत ने उस हरेक शख़्स को तलाशा औ" फिर बेज़ुबाँ कर दिया
वो बस एक चिंगारी थी मगर जो आग दिलों में जली बहुत भयावह थी
आग ठंढी तब हुई जब उस घर में अलग-अलग कई मकाँ कर दिया
'धरम' वो बात जो मुझसे निकली थी वो मुझ तक फिर से पहुँच तो गई
ज़माने ने बात भी बदली औ" एक अलग ही अंदाज़-ए-बयाँ कर दिया
दिल के एक हिस्से में आग लगाई औ" दूसरे हिस्से को धुआँ कर दिया
ज़िंदगी के हरेक कदम के लिए कई टुकड़ों में अपनी ज़मीं तलाशी
औ" बाद उसके तलाशे ज़मीं के सारे टुकड़ों को आसमाँ कर दिया
वो सबसे पुरानी किताब निकाली जिसमें कभी एक ग़म महफूज़ था
मैंने फिर से पढ़ा औ" एक-एक हर्फ़ को ग़मों का आशियाँ कर दिया
वो एक आवाज़ उठी थी तो तख़्त हरेक सियासत का हिल उठा था
हुक़ूमत ने उस हरेक शख़्स को तलाशा औ" फिर बेज़ुबाँ कर दिया
वो बस एक चिंगारी थी मगर जो आग दिलों में जली बहुत भयावह थी
आग ठंढी तब हुई जब उस घर में अलग-अलग कई मकाँ कर दिया
'धरम' वो बात जो मुझसे निकली थी वो मुझ तक फिर से पहुँच तो गई
ज़माने ने बात भी बदली औ" एक अलग ही अंदाज़-ए-बयाँ कर दिया
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