सितारों के पहले भी कोई जहाँ नहीं दीखता
किसी से भी मिलूँ ये दिल जवाँ नहीं दीखता
ज़ेहन में यूँ आग लगी सहरा भी राख हो गया
दिल में दर्द का अब कोई निशाँ नहीं दीखता
वादों की जो बात चली हर नज़र झुकने लगी
सितम का एक इल्म है ये कहाँ नहीं दीखता
इश्क़ दरिया से था मगर हासिल क़तरा हुआ
अब रिश्ते में कोई ताब-ओ-तवाँ नहीं दीखता
वो लहू से पैदा हुआ उसे अश्क़ बहा ले गया
कि आँखों में कोई राज़-ए-निहाँ नहीं दीखता
कैसा जश्न-ए-उल्फ़त है हर चेहरा मायूस है
बाग़ तो है "धरम" कोई बाग़बाँ नहीं दीखता
----------------------------------------------------------
ताब-ओ-तवाँ: शक्ति, जोर, बल, क़ुव्वत, ताक़त
राज़-ए-निहाँ: वो राज़ जो ज़ाहिर न हुआ हो
No comments:
Post a Comment
Note: only a member of this blog may post a comment.