किसे ख़बर थी की वो ख़ुद ही रंग बदल लेगा
कुछ देर तो साथ रहेगा फिर ढंग बदल लेगा
जिसे बुलंदी की चाहत है उसका इश्क़ कैसा
एक पतंग कटेगा तो दूसरा पतंग बदल लेगा
जो टूट गये वो सारे त'अल्लुक़ात तिजारती थे
अब महफ़िल में आने का आहंग बदल लेगा
उसके कोई उसूल थे ही नहीं बस छलावा था
हरेक बात पर वो मुद्द'आ-ए-जंग बदल लेगा
रिश्ते को भी उसने उसूलों की तरह ही रखा
ग़र दिल पर चोट लगेगी तो शंग बदल लेगा
जब एक पत्थर में दुआ का कोई असर न हो
"धरम" वो फिर कोई दूसरा संग बदल लेगा
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आहंग : तौर तरीक़ा
शंग : दिल लगी करने वाला
संग : पत्थर