आसमाँ को गिरने दो इसे और न अब थाम यारो
हो जाने दो अपने भरम का तश्त-अज़-बाम यारो
इमां तो बिक चुका है मगर डर अब भी ज़िंदा है
यहाँ अब काम कोई होता नहीं खुले-'आम यारो
कोई तो सितम हुआ की गर्दन उसकी झुक गई
यहाँ कौन करता है सर-ए-आम एहतिराम यारो
ख़ुशी या ग़म जो भी हो एक चराग़ रौशन करना
कभी ज़िंदगी में ग़र हो कोई सुब्ह या शाम यारो
जिस्म ज़िंदा है मगर रूह तो सबका मर चुका है
कुछ तो बताओ यहाँ कैसे करते हो क़याम यारो
अभी तो क़ाफ़िला चला ही है मंज़िल अभी दूर है
अभी से इतना मत किया करो दुआ-सलाम यारो
अभी तो सिर्फ़ ज़ुबाँ कटी है और सब सलामत है
ठहरो की अभी कुछ और भी मिलेगा इनाम यारो
ख़याल नहीं "धरम" मगर उसका कुछ नाम तो है
ख़ुद को तो वो कहता है परिंदा कोई बेनाम यारो
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तश्त-अज़-बाम : भेद खुलना
एहतिराम : सम्मान