अर्पित बलि पर है मानव का सुविचार
फिर क्यूँ ख़त्म हो यह भ्रष्टाचार
चलते रहने दो यू ही व्यभिचार
मत करो इस पर पुनः विचार
हाय रे सरकार, हाय रे सरकार...
मंत्री ही करे जनता पर अत्याचार
फिर करे संसद में भी विचार
और कहे बंद करो यह भ्रष्टाचार
हम सब लड़ने को हैं तैयार
हाय रे सरकार, हाय रे सरकार...
मंत्री ही रखवाते हैं अबैध हथियार
करवाते हैं मानव जीवन का व्यापार
कभी जाने जाती हैं, कभी मानवता होती है शर्मशार
और फिर कहते हैं, उनके हैं अद्भुत विचार
हाय रे सरकार, हाय रे सरकार...
फिर क्यूँ ख़त्म हो यह भ्रष्टाचार
चलते रहने दो यू ही व्यभिचार
मत करो इस पर पुनः विचार
हाय रे सरकार, हाय रे सरकार...
मंत्री ही करे जनता पर अत्याचार
फिर करे संसद में भी विचार
और कहे बंद करो यह भ्रष्टाचार
हम सब लड़ने को हैं तैयार
हाय रे सरकार, हाय रे सरकार...
मंत्री ही रखवाते हैं अबैध हथियार
करवाते हैं मानव जीवन का व्यापार
कभी जाने जाती हैं, कभी मानवता होती है शर्मशार
और फिर कहते हैं, उनके हैं अद्भुत विचार
हाय रे सरकार, हाय रे सरकार...
No comments:
Post a Comment
Note: only a member of this blog may post a comment.