Monday, 5 November 2012

एहसास


पलकों पर ओस की कुछ बूंदें  
हथेली पर थोड़ी सी मेहँदी
रुक्सार पर थोड़ी सी हल्दी
होठों पर अजीब सी मुस्कान

खुद अपने में ही तुम्हारा सिमटना
आईने से लुका-छिपी करना
सरकते दुप्पटे को झटक कर उठाना
अमावश में चांदनी बिखेरना

तुम्हारा जाना जैसे
मानो समुन्दर की लहरों का
दिल के ऊपर से गुजरना
थोड़ी बेचैनी और थोडा दर्द भी

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