किसका ग़म है जो तुझे खाए जा रहा है
वो कौन है यहाँ जो तुझे भुलाये जा रहा है
पलटकर देखो तुझे कोई नहीं अपनाये जा रहा है
फिर क्यों तुम अपने आप में भरमाये जा रहा है
मुद्दतों बाद आज फिर तुमने जो देखा है आईना
देखकर खुद अपने अक्स को शर्माए जा रहा है
लफ़्ज़ों की कशिश में बेदिली औ" ये हर्फ़-ए-मोहब्बत
फिर भला क्यूँ तुम मुझे झूठे किस्से सुनाए जा रहा है
यहाँ तो हर ओर फैली है आफताब की रौशनी
तब भला तुम क्यूँ ये चिराग जलाये जा रहा है
सीने से अपना दिल निकालकर उसे चूम रहे हो
कौन है जो अपने होने का एहसास कराए जा रहा है
महफ़िल ख़त्म हुई सारे कद्रदान जा चुकें हैं "धरम"
अब भला तुम किसको आखों से पिलाये जा रहा है
वो कौन है यहाँ जो तुझे भुलाये जा रहा है
पलटकर देखो तुझे कोई नहीं अपनाये जा रहा है
फिर क्यों तुम अपने आप में भरमाये जा रहा है
मुद्दतों बाद आज फिर तुमने जो देखा है आईना
देखकर खुद अपने अक्स को शर्माए जा रहा है
लफ़्ज़ों की कशिश में बेदिली औ" ये हर्फ़-ए-मोहब्बत
फिर भला क्यूँ तुम मुझे झूठे किस्से सुनाए जा रहा है
यहाँ तो हर ओर फैली है आफताब की रौशनी
तब भला तुम क्यूँ ये चिराग जलाये जा रहा है
सीने से अपना दिल निकालकर उसे चूम रहे हो
कौन है जो अपने होने का एहसास कराए जा रहा है
महफ़िल ख़त्म हुई सारे कद्रदान जा चुकें हैं "धरम"
अब भला तुम किसको आखों से पिलाये जा रहा है
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