Sunday, 24 April 2016

!! उठो विप्रवर उठो !!

तप करो ऐसा कठिन कि हरा न सके कोई बुद्धि बल में
झुके चरण में नृप तेरे और हाहाकार उठे दानव दल में

अब हो संगठित ऐसे कि हर मुख गहे तेरी महिमा
अंक का यह खेल उलट दो प्राप्त करो अपनी गरिमा

लिखो खड्ग पर वेद और उपनिषद से उसे तुम तेज करो
जो भी हो विरुद्ध मानवता के तुम तुरत उसे नि:तेज करो

अर्पित अपना रक्त कर तू कर रण-चंडी का श्रृंगार
कर प्रसन्न उस देवी को तू प्राप्त कर शक्ति अपार

......अभी और लिखना बाकी है ...

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