1.
मैं खुद को तुझमे फ़ना होकर जीना चाहता हूँ
ज़िंदगी का हर दर्द तेरे होठों से पीना चाहता हूँ
2.
मेरी भटकती रूह को अपने बदन में पनाह दे दो
खुद को देखने के लिए तुम अपनी निगाह दे दो
3.
लपेटो कफ़न मेरे जिस्म में अपने आँगन में गाड़ दो
कि मैं तेरी नज़र में रहूँ औ" तुम मुझे भरपूर प्यार दो
4.
हज़ारों मर्ज़ झुक गया है बस एक तेरी चाहत के आगे
औ" मुझे अपना हश्र पता है वो तेरी मोहब्बत के आगे
मैं खुद को तुझमे फ़ना होकर जीना चाहता हूँ
ज़िंदगी का हर दर्द तेरे होठों से पीना चाहता हूँ
2.
मेरी भटकती रूह को अपने बदन में पनाह दे दो
खुद को देखने के लिए तुम अपनी निगाह दे दो
3.
लपेटो कफ़न मेरे जिस्म में अपने आँगन में गाड़ दो
कि मैं तेरी नज़र में रहूँ औ" तुम मुझे भरपूर प्यार दो
4.
हज़ारों मर्ज़ झुक गया है बस एक तेरी चाहत के आगे
औ" मुझे अपना हश्र पता है वो तेरी मोहब्बत के आगे
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