इधर जो लग गई आग इसे तुम अब याद रखना
कि जला के अपना दिल तुम भी अब तैयार रखना
अपने इश्क़ के दरम्याँ का चिलमन मैंने हटा दिया
तुझे तो अब भी ठीक लगता है इसमें दीवार रखना
हम खूब वाकिब हैं तेरे अंदाज़-ए-ज़ुल्म-औ-सितम से
ये तेरी ही फितरत है यहाँ हर किसी को बीमार रखना
तेरा ज़िक्र सुनकर यहाँ आ गए हैं कई और दिलफ़रेब
ये इल्तिज़ा है तुम भी अपने आप को होशियार रखना
अब तो तेरे महफ़िल में न रौनक है औ" न ही क़द्रदान
अब तुम भूल ही जाओ "धरम" ख्वाइशें हज़ार रखना
कि जला के अपना दिल तुम भी अब तैयार रखना
अपने इश्क़ के दरम्याँ का चिलमन मैंने हटा दिया
तुझे तो अब भी ठीक लगता है इसमें दीवार रखना
हम खूब वाकिब हैं तेरे अंदाज़-ए-ज़ुल्म-औ-सितम से
ये तेरी ही फितरत है यहाँ हर किसी को बीमार रखना
तेरा ज़िक्र सुनकर यहाँ आ गए हैं कई और दिलफ़रेब
ये इल्तिज़ा है तुम भी अपने आप को होशियार रखना
अब तो तेरे महफ़िल में न रौनक है औ" न ही क़द्रदान
अब तुम भूल ही जाओ "धरम" ख्वाइशें हज़ार रखना
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