अभी दीवार पूरी तरह से उठी नहीं है
थोड़ा मैं भी झांक सकता हूँ तुझमें
और थोड़ा तुम भी मुझमें
हाँ मगर दीवार की नीब बहुत मजबूत है
एक बार बन गई तो फिर
उसको गिराना मुश्किल होगा
तुम्हारे उसूल पर बनी ईमारत
अब ढह गई है
उसी ईमारत की ईटें
इस दीवार में लगा रही हो तुम
छूता हूँ तो ईटें बोलने लगते हैं
कहतें है
अभी तो ईमारत से मुक्त हुआ हूँ
फिर से मत बांधो मुझे
तुम्हारा मौन
मेरे हरेक अभिव्यक्ति पर भारी है
उसे भी एक दिन गिरना पड़ेगा
तुम्हारे उसूल के ईमारत की तरह
उसके बाद सिर्फ चीख सुनाई देगी
जो काटने दौड़ेंगे
मेरी साँसें अब चुभती हैं तुझे
अपूर्ण दीवार आँखों को खटक रही हैं
तुम इसे पूरा कर दो
ताकि ताउम्र हम दोनों
दफ़न हो जाएँ एक दूसरे के लिए
थोड़ा मैं भी झांक सकता हूँ तुझमें
और थोड़ा तुम भी मुझमें
हाँ मगर दीवार की नीब बहुत मजबूत है
एक बार बन गई तो फिर
उसको गिराना मुश्किल होगा
तुम्हारे उसूल पर बनी ईमारत
अब ढह गई है
उसी ईमारत की ईटें
इस दीवार में लगा रही हो तुम
छूता हूँ तो ईटें बोलने लगते हैं
कहतें है
अभी तो ईमारत से मुक्त हुआ हूँ
फिर से मत बांधो मुझे
तुम्हारा मौन
मेरे हरेक अभिव्यक्ति पर भारी है
उसे भी एक दिन गिरना पड़ेगा
तुम्हारे उसूल के ईमारत की तरह
उसके बाद सिर्फ चीख सुनाई देगी
जो काटने दौड़ेंगे
मेरी साँसें अब चुभती हैं तुझे
अपूर्ण दीवार आँखों को खटक रही हैं
तुम इसे पूरा कर दो
ताकि ताउम्र हम दोनों
दफ़न हो जाएँ एक दूसरे के लिए
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