जिस इन्तहाँ के इंतज़ार में था उसका कई बार गुज़र जाना हुआ
मुझे एहसास भी न हो सका कि कैसे कई बार बिखर जाना हुआ
महफ़िल थी ख़्वाब था किरदार थे औ" थे मेरे कुछ कद्रदान भी
सिर्फ एक ही इन्तहाँ के बाद कैसे इस सब का उजड़ जाना हुआ
कभी तो ज़ख्मों तले भी मुझको कुछ ख़ुश-नुमा एहसास होता था
मगर ये कैसी ख़ुशी मिली कि ज़ख्म का ता-उम्र ठहर जाना हुआ
कि बाद मेरे मरने के भी उस सितमगर का क़हर मुसलसल जारी था
नतीजा यह हुआ की मेरे कब्र पर एक और कब्र का उभर जाना हुआ
मेरी तलाश-ए-ज़िंदगी महज़ उस मौत के बाद ख़त्म नहीं हुई थी
मगर क्यूँकर उस रूह का बस एक ही ज़िस्म में ठहर जाना हुआ
वो वक़्त भी गया वो ज़िंदगी भी गई "धरम" कि वो ज़िस्म भी गया
क्यूँ फिर से पिछले ही ज़ख्मों का नई ज़िंदगी में उभर जाना हुआ
मुझे एहसास भी न हो सका कि कैसे कई बार बिखर जाना हुआ
महफ़िल थी ख़्वाब था किरदार थे औ" थे मेरे कुछ कद्रदान भी
सिर्फ एक ही इन्तहाँ के बाद कैसे इस सब का उजड़ जाना हुआ
कभी तो ज़ख्मों तले भी मुझको कुछ ख़ुश-नुमा एहसास होता था
मगर ये कैसी ख़ुशी मिली कि ज़ख्म का ता-उम्र ठहर जाना हुआ
कि बाद मेरे मरने के भी उस सितमगर का क़हर मुसलसल जारी था
नतीजा यह हुआ की मेरे कब्र पर एक और कब्र का उभर जाना हुआ
मेरी तलाश-ए-ज़िंदगी महज़ उस मौत के बाद ख़त्म नहीं हुई थी
मगर क्यूँकर उस रूह का बस एक ही ज़िस्म में ठहर जाना हुआ
वो वक़्त भी गया वो ज़िंदगी भी गई "धरम" कि वो ज़िस्म भी गया
क्यूँ फिर से पिछले ही ज़ख्मों का नई ज़िंदगी में उभर जाना हुआ
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