तेरा मुझ पर कोई रहम-ओ-क़रम नहीं औ" कोई वफ़ा नहीं
दिल किस तरह से टूटा मेरा इसका तुझे कोई अंदाजा नहीं
मेरे इस टूटे दिल को तो "धरम" अब हिज़्र ही मजा देता है
अब फिर से न बढ़ाओ हाथ कि निकलेगा कोई नतीजा नहीं
दिल किस तरह से टूटा मेरा इसका तुझे कोई अंदाजा नहीं
मेरे इस टूटे दिल को तो "धरम" अब हिज़्र ही मजा देता है
अब फिर से न बढ़ाओ हाथ कि निकलेगा कोई नतीजा नहीं
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