Thursday, 30 April 2020

चंद शेर

1.
कि एक उम्र से ठहरी है  ये किस मोड़ पर ज़िंदगी
'धरम' क्यूँकर रास आ ही नहीं रही कोई भी बंदगी

2.
ग़र बात आपके जान की होती तो लहू अपना छलका देता
कि उतारकर आसमाँ से चाँद  आपके माथे पर चस्पा देता

3.

वो  शख़्स कौन था  "धरम"  उसकी उम्र कितनी थी
वो एक चाँद था औ" उम्र उसकी सितारों जितनी थी

4.
दरम्यां ज़िंदगी और मौत के फ़ासला सिर्फ़ एक सांस का कभी न था
हर दरिया मोम का था  कदम आग के थे औ" रास्ता उम्र भर का था

5.
कि कल का ख्याल कर कभी आज को जी न सका
हर घूँट गले में उतारा मगर एक भी घूँट पी न सका

Monday, 13 April 2020

ख़ुद अपने ही सफर ने मुझको

कई बार  यूँ ही लूटा है  ख़ुद  अपने ही  शहर ने मुझको
कि सरापा  डुबोया है  ख़ुद  अपने  ही  क़हर ने मुझको

वर्षों तक खुली ऑंखें औ" नींद का बिल्कुल ही न आना 
ये आलम भी दिखाया है  ख़ुद अपने ही नज़र ने मुझको 

एक बार मंज़िल पहुंचाया  और  फिर ता-उम्र भटकाया
ये अपने ही हाथों सजाये  ख़ुद अपने ही डगर ने मुझको

मौत से कदम भर का फ़ासला  औ"  उम्र भर का वास्ता
क्या खूब सिखाया 'धरम' ख़ुद अपने ही सफर ने मुझको