1.
कि एक उम्र से ठहरी है ये किस मोड़ पर ज़िंदगी
'धरम' क्यूँकर रास आ ही नहीं रही कोई भी बंदगी
2.
ग़र बात आपके जान की होती तो लहू अपना छलका देता
कि उतारकर आसमाँ से चाँद आपके माथे पर चस्पा देता
3.
वो शख़्स कौन था "धरम" उसकी उम्र कितनी थी
वो एक चाँद था औ" उम्र उसकी सितारों जितनी थी
4.
दरम्यां ज़िंदगी और मौत के फ़ासला सिर्फ़ एक सांस का कभी न था
हर दरिया मोम का था कदम आग के थे औ" रास्ता उम्र भर का था
5.
कि कल का ख्याल कर कभी आज को जी न सका
हर घूँट गले में उतारा मगर एक भी घूँट पी न सका
कि एक उम्र से ठहरी है ये किस मोड़ पर ज़िंदगी
'धरम' क्यूँकर रास आ ही नहीं रही कोई भी बंदगी
2.
ग़र बात आपके जान की होती तो लहू अपना छलका देता
कि उतारकर आसमाँ से चाँद आपके माथे पर चस्पा देता
3.
वो शख़्स कौन था "धरम" उसकी उम्र कितनी थी
वो एक चाँद था औ" उम्र उसकी सितारों जितनी थी
4.
दरम्यां ज़िंदगी और मौत के फ़ासला सिर्फ़ एक सांस का कभी न था
हर दरिया मोम का था कदम आग के थे औ" रास्ता उम्र भर का था
5.
कि कल का ख्याल कर कभी आज को जी न सका
हर घूँट गले में उतारा मगर एक भी घूँट पी न सका
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