कई बार यूँ ही लूटा है ख़ुद अपने ही शहर ने मुझको
कि सरापा डुबोया है ख़ुद अपने ही क़हर ने मुझको
वर्षों तक खुली ऑंखें औ" नींद का बिल्कुल ही न आना
ये आलम भी दिखाया है ख़ुद अपने ही नज़र ने मुझको
एक बार मंज़िल पहुंचाया और फिर ता-उम्र भटकाया
ये अपने ही हाथों सजाये ख़ुद अपने ही डगर ने मुझको
मौत से कदम भर का फ़ासला औ" उम्र भर का वास्ता
क्या खूब सिखाया 'धरम' ख़ुद अपने ही सफर ने मुझको
कि सरापा डुबोया है ख़ुद अपने ही क़हर ने मुझको
वर्षों तक खुली ऑंखें औ" नींद का बिल्कुल ही न आना
ये आलम भी दिखाया है ख़ुद अपने ही नज़र ने मुझको
एक बार मंज़िल पहुंचाया और फिर ता-उम्र भटकाया
ये अपने ही हाथों सजाये ख़ुद अपने ही डगर ने मुझको
मौत से कदम भर का फ़ासला औ" उम्र भर का वास्ता
क्या खूब सिखाया 'धरम' ख़ुद अपने ही सफर ने मुझको
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