1.
जब भी दिये की आढ़ में अपना दिल जलाया
बस "धरम" एक सुहाना मुस्तक़बिल जलाया
2.
कि हर मुलाक़ात में वो मुझे एक नया चेहरा देता है
औ" मेरे हर पुराने चेहरे पर 'धरम' वो पहरा देता है
औ" मेरे हर पुराने चेहरे पर 'धरम' वो पहरा देता है
3.
बुलंद हौसले "धरम" घुटनों के बल चले कदम साथ न चला
कि न तो तजुर्बा साथ चला औ" न ही कभी राश्ता साथ चला
4.
कि ज़िंदगी हर कदम मेरे आरज़ू से कमती रही
मेरे हर सजदे पर "धरम" मेरी बंदगी घटती रही
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