Thursday, 9 May 2024

ख़त में लिखा क्या है

अदीब को कुछ मालूम नहीं की ख़त में लिखा क्या है 
क़लम को बिल्कुल पता नहीं की उसकी ख़ता क्या है

दोनों का साथ में साँस लेना औ" हाथ थामकर चलना    
इस बीमारी के 'अलावा दरमियाँ दोनों में बता क्या है

राही जिस शजर तले आराम करते  उसे काट देते थे         
मंज़िल हर राही से यह पूछ रहा की मेरा पता क्या है

कालिख तस्वीर में क़ैद रहता है  चेहरा धुल जाता है  
हर तस्वीर बशर से यह पूछता की तेरा जाता क्या है

तौर-ए-सितम कितने देखे हैं  तुम्हारी उम्र कितनी है 
किसी सूखे हुए दरख़्त के बारे में तुम जानता क्या है  
    
वक़्त ने मोहलत तो दी थी मगर चिराग़ जला न सके  
कि ज़मीं औ" आसमाँ को 'धरम' अब देखता क्या है  

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