Tuesday, 21 October 2025

रहबर का तमाशा देखिए

सफ़र में निकले हैं रहबर का तमाशा देखिए
मंज़िल फ़तह करने वालों की हताशा देखिए

तख़्त मिलते ही ज़ेहन में जिन्न पैवस्त हो गया
लहू में सना है ये ताज़ कैसे बे-तहाशा देखिए

मंज़िल ख़ुद ही हैरान है कौन उसको खा गया
फ़लक़ की आँखों में छाई यह निराशा देखिए

गूँगों की आवाज़ में आज ऐसी ताक़त आ गई
बहरों के कानों तक पहुँची इर्ति'आशा देखिए

अभी तो उम्र शुरू हुई है हयात पूरी बाक़ी है 
अभी से ज़मीं में गड़ने का मत तहाशा देखिए

इंसानों की जमात है इंसानियत की ही बात है 
सबके ज़ेहन में छुपा 'धरम' एक रा'शा देखिए

---------------------  
इर्ति'आशा: प्रतिध्वनि
तहाशा : भय / डर
रा'शा : कंपन / थरथराहट

No comments:

Post a Comment

Note: only a member of this blog may post a comment.