सफ़र में निकले हैं रहबर का तमाशा देखिए
मंज़िल फ़तह करने वालों की हताशा देखिए
तख़्त मिलते ही ज़ेहन में जिन्न पैवस्त हो गया
लहू में सना है ये ताज़ कैसे बे-तहाशा देखिए
मंज़िल ख़ुद ही हैरान है कौन उसको खा गया
फ़लक़ की आँखों में छाई यह निराशा देखिए
गूँगों की आवाज़ में आज ऐसी ताक़त आ गई
बहरों के कानों तक पहुँची इर्ति'आशा देखिए
अभी तो उम्र शुरू हुई है हयात पूरी बाक़ी है
अभी से ज़मीं में गड़ने का मत तहाशा देखिए
इंसानों की जमात है इंसानियत की ही बात है
सबके ज़ेहन में छुपा 'धरम' एक रा'शा देखिए
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इर्ति'आशा: प्रतिध्वनि
तहाशा : भय / डर
रा'शा : कंपन / थरथराहट
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