Tuesday, 14 April 2026

जुगनू ही उस्ताद रहा

वो रात जुगनुओं की थी  जुगनू ही उस्ताद रहा
बिसात पर उस रात में न कोई और नर्राद रहा

कतरा दरिया समंदर सब के सब बिखर गए   
उस ज़लज़ला में मगर वो लम्हा आबाद रहा

कैसे कह दूँ की वो इश्क़ मुकम्मल हुआ होगा
सब की जुबाँ पर  जो बनकर बस रूदाद रहा

हाथ मिलाकर  लेन-देन का मुआहिदा किया
वहाँ किसी को भी न याद पुराना फ़साद रहा

क़ितार पहले लम्बी लगी फिर गोल होते गई
अब पता ही नहीं की कौन किसके बाद रहा

न जाने साथ कैसा था  सफ़र तन्हा ही गुज़रा
कहने को तो साथ उसका बहुत नौशाद रहा

जिस्म और रूह दोनों की दुनियाँ अलग रही       
पता ही नहीं कि मिज़ाज कभी भी शाद रहा

पहले उसकी ही ज़िंदगी की कहानी पढ़ लो         
जो ता-उम्र 'धरम' बनकर बस ना-मुराद रहा   
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नर्राद : चौसर खेलने का विशेषज्ञ
रूदाद : घटना का विवरण
मुआहिदा : समझौता, इक़रारनामा
नौशाद : सुंदर, खूबसूरत
शाद : प्रसन्न, ख़ुश

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