कि तिरे दर पे बात कोई भी फ़ुज़ूल नहीं होती
वहाँ चाँद सितारों की गवाही क़ुबूल नहीं होती
किसी की बर्बादी पर यूँ चुप रहना मुँह मोड़ना
आँखों में पड़ी धूल महज़ कोई भूल नहीं होती
चराग़ों को न जाने क्यूँ तारीक़ी रास आने लगी
ये यारी कभी भी क़ाबिल-ए-क़ुबूल नहीं होती
यहाँ सबकी तबी'अत को ये कैसी नज़र लगी
अब तो यहाँ साँसें भी हवा में हुलूल नहीं होती
कभी ज़मीं निगल गई कभी आसमाँ खा गया
ख़ुद की तलाश में अब साँसें निर्मूल नहीं होती
एक झोंका था जो तूफ़ान में बदल गया 'धरम'
उसकी तलाश में अब आँखें मलूल नहीं होती
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हुलूल: एक चीज़ का दूसरी चीज़ में पूरी तरह घुल जाना
मलूल: उदास, खिन्न, दुखी, दुःखित, रंजीदा
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