थोड़ी नादानी ही सही तुमसे
थोड़ी बैमानी ही सही तुमसे
मिजाज़-ए-इश्क मचल गया है
कि दिल ज़रा बहक गया है
आओ मैं तेरा आलिंगन करूँ
फिर तुझको मैं चुम्बन करूँ
हवस का इसे तुम नाम न दो
मेरे आगोश में तुम्हे भी सुकूँ होगा ........
थोड़ी बैमानी ही सही तुमसे
मिजाज़-ए-इश्क मचल गया है
कि दिल ज़रा बहक गया है
आओ मैं तेरा आलिंगन करूँ
फिर तुझको मैं चुम्बन करूँ
हवस का इसे तुम नाम न दो
मेरे आगोश में तुम्हे भी सुकूँ होगा ........
No comments:
Post a Comment
Note: only a member of this blog may post a comment.