Tuesday, 15 November 2011

चंद लम्हे


1.

      बादल के कुछ टुकड़े आसमां में छाये थे
      एक चांदनी रात थी,वो मुझसे मिलने आये थे
      फूलों कि खुश्बू थी,कुछ सितारे भी छाये थे
      हम कुछ दूर-दूर बैठे थे, वो फिर भी हमारे थे

2.


देर से ही सही मेरी याद तो आई
रफ्ता-रफ्ता तू करीब तो आई
ये तेरी मोहब्बत है या ज़रूरत
मुझे पता नहीं ए दिल-ए-हुकूमत
बस सुकूं सिर्फ इतना है
कुछ पल के लिए ही सही
तुम्हे मेरी याद तो आई

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