जब उसने अपने मंजिल का पता पूछा
फिर से वही सड़क पाया
फिर से वही गली पाया
फिर से वही मकां पाया
जिसके साथ वह जीवन के सपने बुनता था
कभी संग चलता था, कभी रंग भरता था
और फिर कभी उसकी बाहों में सर रख कर
बिलकुल खामोश हो जाता था
फिर से वही सड़क पाया
फिर से वही गली पाया
फिर से वही मकां पाया
जिसके साथ वह जीवन के सपने बुनता था
कभी संग चलता था, कभी रंग भरता था
और फिर कभी उसकी बाहों में सर रख कर
बिलकुल खामोश हो जाता था
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