इश्क कोई सियासी हुकूमत नहीं
यहाँ कोई कैसर नहीं कोई नफ़र भी नहीं
इश्क कोई इबादत-ए-खुदा भी नहीं
यहाँ कोई मौलबी नहीं कोई काफ़िर भी नहीं
इश्क कोई तिजारत-ए-दिल भी नहीं
यहाँ कोई ताजिर नहीं कोई खरीददार भी नहीं
इश्क तो वह पाक रिश्ता है " धरम "
जहाँ इन्सान एक दुसरे में फ़ना हो जाता है
यहाँ कोई कैसर नहीं कोई नफ़र भी नहीं
इश्क कोई इबादत-ए-खुदा भी नहीं
यहाँ कोई मौलबी नहीं कोई काफ़िर भी नहीं
इश्क कोई तिजारत-ए-दिल भी नहीं
यहाँ कोई ताजिर नहीं कोई खरीददार भी नहीं
इश्क तो वह पाक रिश्ता है " धरम "
जहाँ इन्सान एक दुसरे में फ़ना हो जाता है
Wah mere Dharam ... Kya khoob kahi hai ?
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