Tuesday, 21 February 2012

चंद-शेर

1. 

    पी कर ग़म को वो भी मुस्कुराते हैं "धरम"
      तुम भी अपने चेहरे पर ख़ुशी रखा करो ...



2.  

    सुना है पहले पत्थरों में भी दिल होते थे
       अब तो दिल ही पत्थर का हो गया है
          आओ हम भी तन्हाई में ढूंढे
            ख़ुशी के कुछ खामोश पल ...


3.


              पीकर घूँट लहू का उसपर छा जाती है खुमारी
              कोई तो बताओ यारो उसे क्यूँ है ऐसी बीमारी



4.


   ऐ ग़म,
  आओ मैं तुमसे सुलह कर लूँ
  सारे अरमानो का ज़बह कर दूँ
  तू भी तो अब याद रखेगा
  तुमने मुझपर फतह कर ली ...

No comments:

Post a Comment

Note: only a member of this blog may post a comment.