Wednesday, 27 March 2013

प्रेमी-प्रेमिका की गोपनीय बातें


प्रेमिका प्रेमी से : तुम्हारा दिल पत्थर सा क्यूँ है ?
प्रेमी प्रेमिका से : तुम ही कहती थी न की दिल यदि पत्थर सा होता तो इसके टूटने का डर नहीं होता
प्रेमिका प्रेमी से : धत्त ये मैं तेरे लिए थोड़े न कही थी
प्रेमी प्रेमिका से : तो क्या तुम अपने लिए कही थी ?

प्रेमिका प्रेमी से : खैर जाने दो ... तुम तो यूँ ही बात बनाते हो.  अब तुम ये बताओ की तुम कभी-कभी गधे की        
                          तरह क्यूँ करते हो ....मुझे अच्छा नहीं लगता है...
प्रेमी प्रेमिका से : मुझे जब भी एहसास होता है कि तुम आज गधी कि तरह लग रही हो तो मैं सोचता हूँ कि अब
                        तो मुझे गधे के  तरह ही बात करना पड़ेगा नहीं तो तुमको बुरा लगेगा न !!

प्रेमिका प्रेमी से : तुम मुझे कभी-कभी गिद्ध कि तरह क्यूँ घूरते हो ?
प्रेमी प्रेमिका से :  जब तुम कोयल कि तरह सजकर कौवे की तरह बोली बोलती हो तो मुझे लगता है की मुझे
                          भी एक पक्षी की तरह ही व्यव्हार करना चाहिए...

प्रेमिका प्रेमी से : तुम बिल्कुल उल्लू हो ....
प्रेमी प्रेमिका से : हाँ ! यदि मैं उल्लू न होता तो मुझे ये कभी पता नहीं चल पाता की रात के अँधेरे में तुम मेरे
                         अलावा और कितनों से मिलती हो ...

प्रेमिका प्रेमी से : मेरी एक सहेली कविता (काल्पनिक नाम) का प्रेमी कितना अच्छा है .. वह उसकी हरेक बात
                         मानता है.."ही इज सो क्यूट"..
प्रेमी प्रेमिका से :  मुझे तो तुम्हारे अलावा अपने सारे मित्रों की प्रेमिकाएँ बहुत अच्छी लगती है.. पता नहीं
                         भगवान ने तुम्हारे अलावा बाकी सबों को इतना अच्छा क्यूँ बनाया... "ओह माई गॉड" !!!

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