Saturday, 8 June 2013

ख्वाब देखा

उजड़े घर में फिर से पुराना ख्वाब देखा
अमावास की रात में मैंने आफताब देखा
धडकता पत्थर फिर से दिल हो चला था
उसके लौटने का मैंने फिर से ख्वाब देखा

1 comment:

Note: only a member of this blog may post a comment.