Saturday, 11 January 2014

चंद शेर

1.
जब कुछ न बन सका तो सर-ए-आम तमाशा बना दिया
ज़िस्म तो पड़ा रहने दिया हाँ दिल का दरबाजा बना दिया

2.
जो मिले थे हम कभी वह तो बस अब एक किस्सा है
जो प्यार था अब वह दिल का टूटा हुआ एक हिस्सा है

ज़िस्म तो होते थे दो मगर रूह बस एक हुआ करता था
हज़ारों मतभेद तो थे हाँ मगर एक वफ़ा हुआ करता था

मुद्दतों पुरानी बातें भी लगता था जैसे कल ही गुजरा हो
वक़्त भी कुछ यूँ ही गुजरता जैसे अपने लिए ही ठहरा हो

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