अटूट,निष्कपट तथा निस्छल रिश्ते को छोड़
दुनियाँ बीमारू रिश्ते की ओर लगा रही है दौड़
हर जगह यह फ़ैल चुका है घुलकर पर्यावरण में
कार्यालय में,आँगन में,घर में और अन्तःकरण में
रिश्ते की बीमारी कहाँ कभी होती है सिर्फ एक
जुड़ने का डोर होता है एक मगर टूटने के होते अनेक
जो लग गया है रिश्ते को कहीं अब क्षय रोग
बिना इलाज़ किये रिश्ते बदल लेते हैं लोग
जब कभी अकेले में बैठकर सिसकता है रिश्ता
हरेक जोड़ से टूटता है और बस बिलखता है रिश्ता
देखकर फायदे की बात लोग देते हैं मित्रता की दुहाई
जो निकल गया मतलब तो बस हो जाते हैं हरज़ाई
लग गया है रिश्ते को बीमारी तो कैंसर भी अब छोटा लगता है
क्यूँ करें अपनी गलती का एहसास सबको यह खोटा लगता है
नोचकर रिश्ते का अपनापन लेकर अब उड़ गया है गिद्ध
भला बिना अपनापन के भी कोई रिश्ता होता है शुद्ध
दौलतमंद लोग फेंककर पैसा रिश्ते खरीद लाते बाज़ार से
बताते हैं ये आवाम को ख़ुशी-ख़ुशी सूचना देकर अख़बार से
दुनियाँ बीमारू रिश्ते की ओर लगा रही है दौड़
हर जगह यह फ़ैल चुका है घुलकर पर्यावरण में
कार्यालय में,आँगन में,घर में और अन्तःकरण में
रिश्ते की बीमारी कहाँ कभी होती है सिर्फ एक
जुड़ने का डोर होता है एक मगर टूटने के होते अनेक
जो लग गया है रिश्ते को कहीं अब क्षय रोग
बिना इलाज़ किये रिश्ते बदल लेते हैं लोग
जब कभी अकेले में बैठकर सिसकता है रिश्ता
हरेक जोड़ से टूटता है और बस बिलखता है रिश्ता
देखकर फायदे की बात लोग देते हैं मित्रता की दुहाई
जो निकल गया मतलब तो बस हो जाते हैं हरज़ाई
लग गया है रिश्ते को बीमारी तो कैंसर भी अब छोटा लगता है
क्यूँ करें अपनी गलती का एहसास सबको यह खोटा लगता है
नोचकर रिश्ते का अपनापन लेकर अब उड़ गया है गिद्ध
भला बिना अपनापन के भी कोई रिश्ता होता है शुद्ध
दौलतमंद लोग फेंककर पैसा रिश्ते खरीद लाते बाज़ार से
बताते हैं ये आवाम को ख़ुशी-ख़ुशी सूचना देकर अख़बार से
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