Monday, 27 January 2014

ज़िंदगी की दुहाई न दो

मुझे तुम ज़िंदगी की दुहाई न दो
बेसबब फिर से मुझे रुस्वाई न दो

मैं तन्हा हूँ अच्छा हूँ ठीक भी हूँ
मुझे फिर से नज़र-ए-बेवफाई न दो

ये अंज़ाम मोहब्बत का है मैं क़ुबूल करता हूँ
मगर तुम सर-ए-आम मुझे जगहसाई न दो

जो धड़के दिल मेरा उसके प्यार में कभी
ऐ खुदा ! मुझे फिर से ये खुदाई न दो

दिल का मसला था जाँ बार-बार अटक जाती थी
मैं भूल गया हूँ "धरम" मुझे फिर से वो रुलाई न दो

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