हर रोज टूटना बिखरना अच्छा नहीं लगता
किसी को बार-बार मनाना अच्छा नहीं लगता
माना कि उससे रंजिश नई है मगर प्यार तो पुराना है
यकायक मिलें तो नज़र झुकाके निकलना अच्छा नहीं लगता
सुना है कि ऊपर वाला तंग दिल नहीं होता "धरम"
करम ख़ुदा का ग़र मुवाज़ी न बरसे तो अच्छा नहीं लगता
मुवाज़ी : बराबर-बराबर
किसी को बार-बार मनाना अच्छा नहीं लगता
माना कि उससे रंजिश नई है मगर प्यार तो पुराना है
यकायक मिलें तो नज़र झुकाके निकलना अच्छा नहीं लगता
सुना है कि ऊपर वाला तंग दिल नहीं होता "धरम"
करम ख़ुदा का ग़र मुवाज़ी न बरसे तो अच्छा नहीं लगता
मुवाज़ी : बराबर-बराबर
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