1.
दो दिलों का फ़ासला कुछ यूँ बढ़ता गया
गोया बुढ़ापे का रंग जवानी पर चढ़ता गया
2.
ज़ूनू-ए-इश्क़ में गर्क-ए-दरिया का सफर अभी बाकी है
एक रोज मुझको डूबना है मगर वो मंज़र अभी बाकी है
दो दिलों का फ़ासला कुछ यूँ बढ़ता गया
गोया बुढ़ापे का रंग जवानी पर चढ़ता गया
2.
ज़ूनू-ए-इश्क़ में गर्क-ए-दरिया का सफर अभी बाकी है
एक रोज मुझको डूबना है मगर वो मंज़र अभी बाकी है
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