Saturday, 16 August 2014

चंद शेर

1.
जब वो दर्द भरी दास्ताँ अपनी ज़ुबाँ से कह उठा
हर आँख डबडबा उठी औ' हर दिल कराह उठा

2.
कितने ज़ख्मों का असर है तेरे इस दर्द-ऐ-ज़ुबाँ में
गुलाब सी महक भी है और मिस्री सी मिठास भी

3.
तेरी इबादत में जुबाँ कटी औ' होठ भी सिले
कैसा हश्र-ए-इश्क़ है कि कराह भी न निकले

4.
जवानी की सारी हसरतें कब्र में दफ़न हो गई
किस्सा-ए-मोहब्बत बस याद-ए-सुखन हो गई 

No comments:

Post a Comment

Note: only a member of this blog may post a comment.