Saturday, 2 August 2014

चंद शेर

1.
मिटाकर वज़ूद मेरा तुम मुझको भुलाने चले हो
आईने में खुद अपनी शक्ल को झुठलाने चले हो

2.
अपने बज़्म में हर रोज बरपा के क़हर मुझपर
किस्सा-ए-दरियादिली दुनियाँ को सुनाने चले हो

3.
आसमाँ का सितारा हूँ बस दूर से ही प्यारा हूँ
अपनी तपिश में जलता हूँ औ" खड़ा बेसहारा हूँ

4.
कद्र-ए-इश्क़ की "धरम" अब कहाँ किसे है होश
बस मय का चार प्याला और हो गए मदहोश  

5.
तुझसे मरासिम था तो क़त्ल-ए-आम हो गया
इस शहर का हर मकाँ अब तो वीरान हो गया

6.
जला के दिल इन्शाँ का बुत को रौशन कर दिया
तुमने तो पाक-ए-इश्क़ को भी ग़ारत कर दिया

7.
एक नई सुबह की आश है कुछ बचा अभी भी खास है
सारा जग है तेरा अपना रे मन! फिर तू क्यों उदास है





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