मेरे सवाल पर वो फिर अपना सवाल कर गए
मेरे कटे जिस्म को वो फिर से हलाल कर गए
गर्दिश-ए-दौराँ से थककर बस घर लौटा ही था
कि वो आकर मुझे तो और भी बेहाल कर गए
यूँ तो मेरा अपना ग़म-ए-ज़ीस्त कुछ कम न था
वो आकर तो मेरा जीना और भी मुहाल कर गए
ज़माने ने तो मुझे सिर्फ ज़ख्म ही दिए थे "धरम"
छिड़ककर नमक उसपर वो और भी बवाल कर गए
मेरे कटे जिस्म को वो फिर से हलाल कर गए
गर्दिश-ए-दौराँ से थककर बस घर लौटा ही था
कि वो आकर मुझे तो और भी बेहाल कर गए
यूँ तो मेरा अपना ग़म-ए-ज़ीस्त कुछ कम न था
वो आकर तो मेरा जीना और भी मुहाल कर गए
ज़माने ने तो मुझे सिर्फ ज़ख्म ही दिए थे "धरम"
छिड़ककर नमक उसपर वो और भी बवाल कर गए
No comments:
Post a Comment
Note: only a member of this blog may post a comment.