Wednesday, 18 March 2015

चंद शेर

1.
वो एक खुमारी थी उतर गई अब होश में हूँ
ज़िंदगी तू  दूर चला जा मैं पुराने जोश में हूँ

2.
मुद्दतों बाद उस ख्वाब को नज़र भर देखा भी दिल में उतरा भी
आज सुकूँ लौट कर मेरे पहलू में आया भी सर रखकर सोया भी

3.
ज़माना हँस देता है मेरे हर अक़ीदत के बात पर
मेरे ख्वाइशों को वो रखता है सिर्फ अपने लात पर

जो बुलंदी है तो सब का हाथ होता है मेरे हाथ पर
औ" मुफलिसी में छोड़ देता है खुद अपने हालात पर

No comments:

Post a Comment

Note: only a member of this blog may post a comment.