तन्हाई लिपटती है मुझसे मेरे बिस्तर पर
कोई शर्म नहीं उसको कोई हया भी नहीं
न वो रंग बदलती है औ" न ही चेहरा
उसके बदन की ख़ुश्बू आठो प्रहर एक सी है
उसका स्पर्श अतीत भी है और भविष्य भी
उसे कितना भी काटो कटती नहीं है
बांटो तो फिर बस बढ़ने लगती है
मानो ये कह रही हो की मुझे मत छेड़ो
मुझे अपने अंदाज़ में रहने दो जीने दो
तुम मुझसे और मैं तुझसे अलग तो नहीं
तुम्हारे और मेरे दरम्याँ कोई दूरी तो नहीं
अब तक मैं ही तुझसे लिपटती आई हूँ
अब तुम भी मुझसे लिपटो
मेरा आलिंगन करो
यकीं मानो मैं तुझको धोखा नहीं दूंगी
मैं तुम्हारे दिल का वो हिस्सा हूँ
जो हमेशा तुम्हारे साथ रहता है
कोई शर्म नहीं उसको कोई हया भी नहीं
न वो रंग बदलती है औ" न ही चेहरा
उसके बदन की ख़ुश्बू आठो प्रहर एक सी है
उसका स्पर्श अतीत भी है और भविष्य भी
उसे कितना भी काटो कटती नहीं है
बांटो तो फिर बस बढ़ने लगती है
मानो ये कह रही हो की मुझे मत छेड़ो
मुझे अपने अंदाज़ में रहने दो जीने दो
तुम मुझसे और मैं तुझसे अलग तो नहीं
तुम्हारे और मेरे दरम्याँ कोई दूरी तो नहीं
अब तक मैं ही तुझसे लिपटती आई हूँ
अब तुम भी मुझसे लिपटो
मेरा आलिंगन करो
यकीं मानो मैं तुझको धोखा नहीं दूंगी
मैं तुम्हारे दिल का वो हिस्सा हूँ
जो हमेशा तुम्हारे साथ रहता है
No comments:
Post a Comment
Note: only a member of this blog may post a comment.