1.
कि उसका ख़्याल आने से पहले उसकी हर याद मिटा दो
अपनी बची-खुची ज़िंदगी "धरम" तुम इस तरह मिटा दो
2.
कहीं चैन न मिला सुकूँ भी ख़ुद "धरम" दम साध कर बैठा है
अब लिपट जाओ अपनी तन्हाई से तू क्यों अकेले लेटा है
3.
कि मेरी महफ़िल में होना भी औ" तन्हा भी रहना
तेरी बेदिली पर "धरम" मुझे अब और क्या कहना
4.
'धरम' ये जो कलम की चीख़ है वो दिल की पुकार भी है
मैं ऐसा शख़्स हूँ जो चलता भी हूँ और मेरा मज़ार भी है
कि उसका ख़्याल आने से पहले उसकी हर याद मिटा दो
अपनी बची-खुची ज़िंदगी "धरम" तुम इस तरह मिटा दो
2.
कहीं चैन न मिला सुकूँ भी ख़ुद "धरम" दम साध कर बैठा है
अब लिपट जाओ अपनी तन्हाई से तू क्यों अकेले लेटा है
3.
कि मेरी महफ़िल में होना भी औ" तन्हा भी रहना
तेरी बेदिली पर "धरम" मुझे अब और क्या कहना
4.
'धरम' ये जो कलम की चीख़ है वो दिल की पुकार भी है
मैं ऐसा शख़्स हूँ जो चलता भी हूँ और मेरा मज़ार भी है
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