1.
ये कैसी हिज़्र की किताब है "धरम" यहाँ बहता अश्क़ बेहिसाब है
कि किसी से किसी की कोई बात नहीं होती सिर्फ होता आदाब है
2.
जो निकले थे आसमाँ के तलाश में तो अपने हिस्से की ज़मीं भी खो गई
नतीजा यूँ हुआ "धरम" कि मुझे महज़ हवा का एक झोंका ही डुबो गई
3.
इश्क़ कहाँ था "धरम" जो था वो आधा हुस्न था बाकी आधा आज़ार था
कि मख़मली लिबास में जो लिपटा ज़िस्म था वो अंदर से खार-खार था
ये कैसी हिज़्र की किताब है "धरम" यहाँ बहता अश्क़ बेहिसाब है
कि किसी से किसी की कोई बात नहीं होती सिर्फ होता आदाब है
2.
जो निकले थे आसमाँ के तलाश में तो अपने हिस्से की ज़मीं भी खो गई
नतीजा यूँ हुआ "धरम" कि मुझे महज़ हवा का एक झोंका ही डुबो गई
3.
इश्क़ कहाँ था "धरम" जो था वो आधा हुस्न था बाकी आधा आज़ार था
कि मख़मली लिबास में जो लिपटा ज़िस्म था वो अंदर से खार-खार था
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