Friday, 22 June 2018

चंद शेर

1.
जब "धरम" पानी से पानी को जलाया आग से आग बुझाई
कि तब जाकर ग़म खा के ज़िंदगी खुद मेरे क़दमों में आई

2.
पिरोया था अपनी जां को "धरम" तेरी जां में इस कदर
कि ख़ुद को पा लेता था बस देखकर तुझको एक नज़र

3.
दोनों को "धरम"अब तो इस रिश्ते के मरने का इंतज़ार करना है
क्यूँकि दोनों को अब तो अलग-अलग सख़्श पर ऐतवार करना है

4.
कि सर मेरा जब भी झुका 'धरम' क़लम कर दिया गया
उस रिश्ते में पनपे गहराई को भी भरम कर दिया गया  

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