मसीहाई के सबूतों को बर-सर-ए-'आम जला देते हैं
फ़िर ख़ुदाई की बात पर हर किसी को वर्ग़ला देते हैं
फ़िज़ा में ख़ामोशी है ज़ब्र कुछ इस कदर से तारी है
मज़दूरी की बात पर पसीने को पानी में मिला देते हैं
ये तज़ुर्बा ये इल्म ये अदाकारी सब को हैराँ करते हैं
पहले ख़ूब हँसाते हैं बाद उसके ता-उम्र रुला देते हैं
ज़िंदगी-मौत का खेल है तहज़ीब-ओ-तमाशा देखिए
जीतने वाले को ब-तौर इनाम ये दश्त-ए-बला देते हैं
अपने हक़ की बात कीजिए फिर ये रिवायात देखिये
ताज़ शराफ़त का रखते हैं फ़ैसले में बद-बला देते हैं
यहाँ दिल लगाने की बात "धरम" कभी मत कीजिए
यहाँ लोग ऐसे हैं जो रोज़ क़त्ल करते हैं भुला देते हैं
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बर-सर-ए-'आम : सबके सामने
दश्त-ए-बला : desert of calamity
रिवायात : traditions
बद-बला : जान के लिए मुसीबत
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