कि चेहरा तो मेरा हो औ" वो ख़ुद ज़लाल कर सके
साथ इसलिए रखा की आसानी से हलाल कर सके
कोई भी इरादा इस इरादे से कभी कमतर तो न था
मुझको रुस्वा करे ना-मुरादी की मिसाल कर सके
कि यह फ़ैसला लेना कोई मुश्किल तो न रहा होगा
यारी में मक्कारी करे मुझको तबाह-हाल कर सके
'उरूज पर शख़्सियत सिर्फ़ और सिर्फ़ ख़ुद की हो
अलावा ख़ुद के बाक़ी को रू-ब-ज़वाल कर सके
बात काग़ज़ से निकलकर अब ज़बाँ पर चली आई
कंधा किसी और का हो औ" ख़ुद बवाल कर सके
उसका सिर्फ़ यही एक हुनर देखना बाक़ी है "धरम"
अपना नक़ाब पहनाकर दूसरे को पाएमाल कर सके
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ज़लाल : पाप, गुनाह
'उरूज : ऊँचाई, बलंदी
रू-ब-ज़वाल : पतनोन्मुख
पाएमाल : पाँव के नीचे मसला हुआ
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