Tuesday, 31 January 2012

अब साथ चलूँ

आओ चंद कदम अब साथ चलूँ
प्रेम के ढाई अक्षर पढ़ लूँ 
मोहब्बत के चार आयतें लिख दूं
आसमां पर तेरी सलामी लिख दूं


नर्म घास पर से ओस की बूंद चुरा लूं
ठंढे झील के पानी को थपथपाऊँ
बारिश के बूंदों को आखों पे रख लूं
सूरज के किरणों की सीढ़ी बना लूं

बहती हवाओं को मुट्ठी में पकडूं
मोर के पंख तेरे बालों में लगा दूँ 
तेरे गालों की लाली को होठों पे रख लूं
तुझे बाहों की कैची में कैद कर लूं

आसमां से चंद सितारे तोड़ लाऊँ
उछलकर चांद को चूम लूं
गुलाब की पंखुड़ी से तेरा नाम लिखूं
तेरे लिखावट के कागज़ की छतरी बनाऊँ

आओ चंद कदम ...

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